Makar Sankranti मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे हर साल 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है और इसे संक्रांति कहते हैं। यह त्योहार नए फसलों के आगमन और प्रकृति के परिवर्तन को दर्शाता है। मकर संक्रांति पर विशेष रूप से स्नान, दान और सूर्य पूजा का महत्व है। इस दिन को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है जैसे कि पोंगल, उत्तरायणी और लोहड़ी।
मकर संक्रांति का ज्योतिषीय पहलू
ज्योतिषीय दृष्टि से, मकर संक्रांति का महत्व अत्यधिक है। मकर राशि शनि ग्रह की राशि है और जब सूर्य, शनि की राशि मकर में प्रवेश करता है, तो यह विशेष ऊर्जा का निर्माण करता है।
- सूर्य का मकर राशि में प्रवेश: यह सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर जाने का प्रतीक है। उत्तरायण को शुभ समय माना जाता है और यह देवताओं के दिन के प्रारंभ का भी संकेत है।
- शनि का महत्व: इस दिन शनि का दान भी विशेष फलदायी होता है क्योंकि सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि में प्रवेश करता है। शनि को न्याय का देवता माना जाता है, और उनका आशीर्वाद जीवन में संतुलन लाता है।
मकर संक्रांति के धार्मिक कार्य
- स्नान:
- पवित्र नदियों, तालाबों, या कुंओं के जल से स्नान करना। यदि ऐसा संभव न हो, तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- स्नान के समय “हर हर गंगे” का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मानसिक और शारीरिक शुद्धि प्रदान करता है।
- सूर्य पूजा:
- सूर्योदय से पहले उठकर सूर्य को जल अर्पित करें। तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल और अक्षत मिलाएं।
- सूर्य मंत्रों का जाप करें और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करें। “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें।
- दान:
- गुड़, तिल, रेवड़ी, गजक, खिचड़ी, गेहूं, और काले तिल का दान करें।
- काले और सफेद कंबल का दान शनि ग्रह के प्रभाव को शांत करता है।
- खिचड़ी में काले मटर और चावल मिलाकर गरीबों में वितरित करें।
गुप्त लक्ष्मी का महत्व और दान का नियम
गुप्त लक्ष्मी का दान मकर संक्रांति का एक विशेष हिस्सा है। ऐसी मान्यता है कि गुप्त रूप से लक्ष्मी का दान करने से घर में सुख-समृद्धि और आरोग्य बना रहता है। यह दान धन, स्वास्थ्य, और मानसिक शांति को बढ़ावा देता है।
पौराणिक कथा
एक कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु और शिव नदी में स्नान कर रहे थे, लक्ष्मी जी छिपकर उनके दर्शन कर रही थीं। शिव जी ने लक्ष्मी जी को गुप्त लक्ष्मी के रूप में मान्यता दी और कहा कि इस दिन गुप्त रूप से लक्ष्मी का दान करने से विशेष कृपा प्राप्त होगी।
दान की विधि
- गुड़ और तिल के लड्डू बनाएं और उनमें एक या दो रुपये का सिक्का छिपाएं।
- इसे मंदिर में गुप्त रूप से दान करें। ध्यान रहे कि यह दान गुप्त हो, जिससे लेने वाले को भी सिक्के का पता न चले।
- चावल, खिचड़ी, या अन्य अनाज के दान में भी गुप्त रूप से पैसे रख सकते हैं। यह दान लेने वाले को आश्चर्य और प्रसन्नता का अनुभव कराता है।
गुप्त दान के लाभ
- घर में आरोग्य और शांति का निवास होता है।
- गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, किडनी, और लीवर की समस्याओं से बचाव होता है।
- धन की बढ़ोतरी और लक्ष्मी का वास होता है।
- सामाजिक सामंजस्य और परोपकार की भावना को बढ़ावा मिलता है।
मकर संक्रांति पर दान की सामग्री
- सूर्य का दान: तिल, गुड़, खिचड़ी, गेहूं।
- शनि का दान: काले तिल, कंबल, लोहे की वस्तुएं।
- खास दान: खिचड़ी में काले मटर मिलाकर दान करें। यह शनि और सूर्य दोनों को संतुष्ट करता है।
FAQs
1. मकर संक्रांति पर स्नान का महत्व क्या है?
मकर संक्रांति पर स्नान से पवित्रता प्राप्त होती है और यह शरीर को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करता है। यह आत्मा को शुद्ध करने का साधन है।
2. गुप्त लक्ष्मी दान का क्या महत्व है?
गुप्त लक्ष्मी दान से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और बड़ी बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। यह दान भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्त करने का माध्यम है।
3. मकर संक्रांति पर कौन-कौन सी चीजें दान करनी चाहिए?
गुड़, तिल, रेवड़ी, खिचड़ी, गेहूं, काले तिल, काले कंबल और लोहे की वस्तुओं का दान शुभ होता है।
4. मकर संक्रांति पर खिचड़ी का महत्व क्यों है?
खिचड़ी एक संपूर्ण आहार है और इसे दान करना ऊर्जा और पोषण का प्रतीक है। यह गरीबों की मदद करने का एक सरल और प्रभावी तरीका है।
5. क्या मकर संक्रांति पर कोई विशेष पूजा की जाती है?
जी हां, सूर्य देवता की पूजा की जाती है और उन्हें जल अर्पित किया जाता है। इसके साथ ही शनि देव की शांति के लिए दान करना भी महत्वपूर्ण है।
6. गुप्त दान कैसे करें?
गुप्त दान का अर्थ है ऐसा दान जो छिपा हुआ हो। जैसे, लड्डू या खिचड़ी में सिक्का छुपाकर या मंदिर में चुपचाप दान करना। यह दान आत्मिक संतुष्टि और शुभ फल प्रदान करता है।
मकर संक्रांति न केवल धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में सामूहिकता और परोपकार का संदेश भी देता है। गुप्त लक्ष्मी का दान करके इस पर्व को और भी सार्थक बनाया जा सकता है।
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